शिक्षकों ने लगाये गंभीर आरोप , बीईईओ ने दी चेतावनी
उधवा (साहिबगंज): प्रखंड क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) योजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। क्षेत्र की प्रमुख गैस एजेंसी ‘वेदव्यास इंडेन गैस एजेंसी’ द्वारा समय पर एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति नहीं किए जाने के कारण उधवा के अधिकांश स्कूलों में बच्चों के लिए खाना बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस गंभीर लापरवाही को लेकर शिक्षकों में भारी रोष है।
बीईईओ ने पत्र जारी कर जताई कड़ी नाराजगी
शिक्षकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO), उधवा रोबिन मंडल ने कड़ा रुख अपनाया है। बीईईओ ने पत्रांक 156 (दिनांक: 16.04.2026) के माध्यम से वेदव्यास इंडेन गैस एजेंसी के आपूर्तिकर्ता को आधिकारिक पत्र भेजकर कड़ी फटकार लगाई है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पिछले एक माह से एजेंसी द्वारा विद्यालयों को गैस सिलेंडर की आपूर्ति समय पर नहीं की जा रही है।
गुरुगोष्ठी में उठा मामला
जानकारी के अनुसार, बीते 09 अप्रैल 2026 को आयोजित गुरुगोष्ठी में विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रभारी शिक्षकों ने मौखिक और लिखित रूप से इस समस्या को उठाया था। शिक्षकों का कहना है कि गैस के अभाव में उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था करने में काफी कठिनाई हो रही है, जिससे पठन-पाठन का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन
प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी ने अपने पत्र में चेतावनी देते हुए कहा है कि:
“बच्चों का मध्याह्न भोजन उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के आदेश पर निर्बाध रूप से चलाए जाने की बाध्यता है। समय पर गैस आपूर्ति न होने से बच्चों का मध्याह्न भोजन बाधित होने की प्रबल संभावना बनी हुई है, जो कि एक अत्यंत खेदजनक स्थिति है।”
इन अधिकारियों को भेजी गई प्रतिलिपि
मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतिलिपि जिला शिक्षा अधीक्षक (साहिबगंज) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (उधवा) को भी सूचनार्थ और आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी गई है। विभाग ने सख्त निर्देश दिया है कि विद्यालय स्तर पर गैस की आपूर्ति अविलंब सुनिश्चित की जाए ताकि बच्चों के पोषण और उनके अधिकारों के साथ कोई समझौता न हो।
इधर मामले में पारा शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष मैनुल हक़ ने पूरी जानकारी देते हुए गैस वितरक एजेंसी पर कई गंभीर आरोप लगाये हैं । उन्होंने बताया कि प्रखंड के लगभग 90% विद्यालयों में गैस आपूर्ति बाधित है, जिससे मिड-डे मील योजना पूरी तरह चरमरा गई है।
जिलाध्यक्ष ने यह भी साझा किया कि हाल ही में हुई गुरुगोष्ठी में यह पूरा मामला रखा गया था, लेकिन वहां से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बीईईओ के पत्र के बाद भी सुधार नहीं हुआ, तो जिला स्तर पर इस मुद्दे को और भी मजबूती से उठाया जाएगा।
उन्होंने गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “अगर किसी स्कूल को महीने में 4 सिलेंडरों की जरूरत है, तो एजेंसी उनसे जबरन 10 सिलेंडरों के आवेदन पर हस्ताक्षर करवाती है, लेकिन आपूर्ति नहीं करती।
जिलाध्यक्ष के अनुसार, गैस एजेंसी किसी भी आवेदन की रिसीविंग (पावती) नहीं देती है। जब कोई शिक्षक या स्कूल प्रबंधन समय पर गैस के लिए संपर्क करता है, तो एजेंसी के मैनेजर और संचालक का व्यवहार बेहद संवेदनहीन और सहयोगात्मक नहीं रहता।
अब देखना यह है कि प्रशासन की इस सख्ती के बाद गैस एजेंसी अपनी सेवाओं में सुधार करती है या बच्चों के निवाले पर यह संकट बरकरार रहता है।