साहिबगंज: जिले में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि ने तटीय और दियारा क्षेत्रों के निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। बिहार के बक्सर से लेकर फरक्का तक जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही कोशी जैसी सहायक नदियों में आए उफान के कारण गंगा का जलस्तर लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से लगातार बढ़ रहा है।
चेतावनी रेखा की ओर बढ़ रहा पानी
केंद्रीय जल आयोग (CWC) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार सुबह साहिबगंज में गंगा का जलस्तर 23.64 मीटर दर्ज किया गया। यदि जलस्तर में बढ़ोतरी की यही रफ्तार बनी रही, तो अगले 5 से 6 दिनों के भीतर पानी चेतावनी रेखा (26.25 मीटर) तक पहुँच सकता है। ज्ञात हो कि साहिबगंज में खतरे का निशान 27.25 मीटर निर्धारित है।
किसानों और पशुपालकों की बढ़ी मुश्किले
जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि के कारण दियारा क्षेत्र के निचले हिस्सों और कृषि योग्य जमीनों में पानी प्रवेश करने लगा है। इससे किसानों की खड़ी फसलों के डूबने का संकट गहरा गया है, साथ ही मवेशियों के लिए चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न होने लगी है।
गौरतलब है कि गंगा तटीय क्षेत्र के लगभग 83 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 108 गांवों की 50 हजार से अधिक आबादी हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलने को मजबूर होती है और स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ता है।
जिला प्रशासन मुस्तैद, तैयारियाँ पूरी
संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड़ पर है। सदर अंचल के अंचलाधिकारी सह प्रभारी प्रखंड विकास पदाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने प्रभावित तटीय व दियारा क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।
प्रशासनिक रुख:
अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए अस्थायी आश्रय स्थलों, मवेशियों के चारे और आवश्यक राहत सामग्री वितरण हेतु टेंडर प्रक्रिया पूर्व में ही पूरी कर ली गई है। बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होते ही प्रभावित लोगों तक त्वरित राहत एवं सहायता पहुँचाने के लिए सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं।