राष्ट्रपति, पीएम मोदी समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
न्यूज़ डेस्क नई दिल्ली/पटना/रांची:
भारतीय संविधान के शिल्पकार, समाज सुधारक और ‘भारत रत्न’ डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती आज देशभर में ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाई जा रही है। कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक और विशेष रूप से पूर्वी भारत के राज्यों में बाबासाहेब के अनुयायी उन्हें नमन कर रहे हैं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने ‘X’ पर व्यक्त किए विचार
देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बाबासाहेब को नमन करते हुए लिखा, “डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। वे एक महान समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन न्यायपूर्ण समाज के निर्माण के लिए समर्पित कर दिया।”
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘X’ पर एक वीडियो संदेश और पोस्ट साझा किया। उन्होंने कहा, “बाबासाहेब अंबेडकर वंचितों और पीड़ितों के सशक्तिकरण के प्रेरणापुंज हैं। हमारा संविधान उनकी दूरदृष्टि का परिणाम है, जो हर नागरिक को प्रगति के समान अवसर प्रदान करता है।” पीएम मोदी ने आज संसद भवन परिसर में बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
बिहार-झारखंड: नीतीश कुमार और हेमंत सोरेन ने दी श्रद्धांजलि
चूंकि बिहार और झारखंड में बाबासाहेब के विचारों का गहरा प्रभाव है, यहाँ के मुख्य नेतृत्व ने भी उन्हें विशेष रूप से याद किया।
- नीतीश कुमार (बिहार): बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाबासाहेब को नमन करते हुए ‘X’ पर लिखा कि बाबासाहेब ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा में लाने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने बिहार सरकार द्वारा बाबासाहेब के पदचिह्नों पर चलकर चलाए जा रहे कल्याणकारी कार्यों का भी उल्लेख किया।
- हेमंत सोरेन (झारखंड): झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के अंबेडकर चौक पर राज्यपाल के साथ पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘X’ पर पोस्ट कर कहा, “आज का दिन एक विशाल लोकतांत्रिक देश के लिए गौरव का क्षण है। बाबासाहेब का योगदान न कभी छिपा था और न कभी रहेगा। जब तक दुनिया रहेगी, उनके विचार अमर रहेंगे।”
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर: संघर्ष से शिखर तक का सफर
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति का इतिहास नहीं, बल्कि एक सामाजिक क्रांति की कहानी है।
- जन्म: उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था।
- शिक्षा: वे बचपन से ही मेधावी थे। तमाम सामाजिक बाधाओं के बावजूद उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे उस समय के सबसे उच्च शिक्षित भारतीयों में शुमार थे।
- मसीहा के रूप में उदय: उन्होंने दलितों, वंचितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए ‘मूकनायक’ और ‘बहिष्कृत भारत’ जैसी पत्रिकाओं के जरिए आवाज उठाई। 1927 का महाड़ सत्याग्रह उनके संघर्षों का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।
- संविधान निर्माता: वे आजाद भारत के पहले कानून मंत्री बने और भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसे आधुनिक भारत का खाका खींचा जहाँ जाति, लिंग या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो।
- धर्म परिवर्तन: सामाजिक समानता के लिए उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्षों में नागपुर में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया।
श्रद्धांजलि
बाबासाहेब ने कहा था, “शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो पिएगा वह दहाड़ेगा।” आज उनके विचारों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।