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रांची : झारखंड में प्रशासनिक पारदर्शिता और सूचना के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में राजभवन ने एक बड़ा फैसला लिया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को सशर्त मंजूरी देते हुए चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इन नवनियुक्त सूचना आयुक्तों में राज्य के वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा (Anuj Kumar Sinha) का भी नाम शामिल है।

उनके साथ ही तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक को भी इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यपाल की इस मंजूरी के बाद राज्य में पिछले कई वर्षों से ठप पड़ा सूचना आयोग अब दोबारा पूरी तरह सक्रिय होने जा रहा है।

अनुज कुमार सिन्हा: पत्रकारिता के शिखर से सूचना आयुक्त के पद तक

इस पूरी नियुक्ति में अनुज कुमार सिन्हा का चयन बेहद विशेष माना जा रहा है। अनुज कुमार सिन्हा झारखंड और बिहार की पत्रकारिता में एक जाना-माना और बेहद सम्मानित नाम हैं। उन्होंने हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ में लगभग तीन दशकों (30 साल) से अधिक समय तक बेहद महत्वपूर्ण और वरिष्ठ पदों (जैसे कार्यकारी संपादक) पर कार्य किया है। अविभाजित बिहार से लेकर अलग झारखंड राज्य बनने के आंदोलन और उसके बाद के विकास को उन्होंने बहुत करीब से देखा और अपनी लेखनी से प्रभावित किया है।

एक निष्पक्ष, गंभीर और जमीनी पत्रकार के रूप में पहचान रखने वाले अनुज कुमार सिन्हा ने कई किताबें भी लिखी हैं, जो झारखंड के इतिहास और संस्कृति को बयां करती हैं। पत्रकारिता में उनके इसी दीर्घकालिक अनुभव, समाज पर पकड़ और प्रशासनिक समझ को देखते हुए सरकार ने उन्हें सूचना आयुक्त जैसे गरिमामयी और अर्ध-न्यायिक (Quasi-Judicial) पद के लिए चुना है।

जानें सूचना आयुक्त के कार्य और भूमिका

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI), 2005 के तहत सूचना आयुक्त की भूमिका एक सजग प्रहरी जैसी होती है। इनका मुख्य कार्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के प्रति सरकारी विभागों की जवाबदेही तय करना है। जब कोई आम नागरिक किसी सरकारी कार्यालय या विभाग से जनहित से जुड़ी जानकारी मांगता है और अधिकारी तय समय सीमा (30 दिन) के भीतर सूचना नहीं देते, या गलत जानकारी प्रदान करते हैं, तो पीड़ित व्यक्ति राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाता है।

सूचना आयुक्त इन मामलों पर कोर्ट की तरह सुनवाई करते हैं। उनके पास दोषी अधिकारियों (PIO) पर आर्थिक जुर्माना लगाने, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करने और जनता को हर हाल में सही सूचना उपलब्ध कराने का कानूनी अधिकार होता है।

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