नीचे देखें: उधवा-पियारपुर के युवा शौकत दादाभाई द्वारा फेसबुक पर शेयर की गई वायरल रील
उधवा: डिजिटल क्रांति के इस दौर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और जन-जागरूकता का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसका एक जीवंत और सकारात्मक उदाहरण हाल ही में साहिबगंज जिले के स्थानीय उधवा-पियारपुर इलाके में देखने को मिला। यहाँ के एक स्थानीय युवक ने पियारपुर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में फल-फूल रहे नशे के अवैध कारोबार और गुप्त रूप से नशा करने वालों के खिलाफ सोशल मीडिया पर आवाज उठाई है। फेसबुक पर ‘शौकत दादाभाई’ -Shaukat Dadabhai नामक प्रोफाइल से साझा की गई एक रील रातों-रात इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद से यह पूरे क्षेत्र में कौतूहल और गहन चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है।
उक्त वायरल वीडियो में युवक ने बेहद हिम्मत और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए पियारपुर बाजार क्षेत्र में चोरी-छिपे नशा करने वाले तत्वों की गतिविधियों को उजागर किया है। उसने सीधे तौर पर सरकार और स्थानीय प्रशासन से इस ओर ध्यान देने तथा त्वरित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। युवक की इस बेबाक पहल ने स्थानीय ग्रामीणों, खासकर युवाओं और अभिभावकों का ध्यान खींचा है। लोग न केवल इस रील को शेयर कर रहे हैं, बल्कि नशे जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ इतनी मुखरता से आगे आने के लिए युवक की प्रशंसा भी कर रहे हैं। देखते ही देखते यह अकेला प्रयास एक जन-जागरूकता अभियान का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि इस वीडियो ने स्थानीय स्तर पर दबे-कुचले और उपेक्षित पड़े एक बेहद गंभीर मुद्दे को उजागर कर दिया है। पियारपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से नशीले पदार्थों के सेवन की प्रवृत्ति में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गुप्त स्थानों, सुनसान रास्तों और बाजार के कोनों में चोरी-छुपे होने वाला यह नशा आज समाज के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर रहा है।
नशे के इस दंश से क्षेत्र को बहुआयामी नुकसान झेलना पड़ रहा है:
- युवा पीढ़ी और भविष्य पर संकट: नशे की लत से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र का युवा वर्ग हो रहा है। जो उम्र शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और देश के निर्माण में लगनी चाहिए, उस उम्र में कई युवा नशे के अंधेरे में भटक रहे हैं। इससे उनका शैक्षणिक करियर तो बर्बाद हो ही रहा है, साथ ही उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
- पारिवारिक तबाही और आर्थिक तंगी: नशा करने वाले व्यक्तियों के परिवार आज अत्यंत दयनीय स्थिति में हैं। लत को पूरा करने के लिए घर की जमा-पूंजी पानी की तरह बहा दी जाती है, जिससे कई परिवार पाई-पाई को मोहताज हो रहे हैं। इसके अलावा, घरों में रोज-रोज होने वाले गृह-क्लेश और तनाव के कारण हंसते-खेलते परिवार बिखर रहे हैं।
- अपराध और असुरक्षा का बढ़ता माहौल: चोरी-छिपे नशा करने की लत सीधे तौर पर अपराध को जन्म देती है। नशे की खुराक हासिल करने के लिए कई बार युवा चोरी तथा अन्य अवैध गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। इससे शांति व सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।
शौकत द्वारा उठाए गए इस कदम ने सोए हुए समाज को जगाने का काम किया है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि एक साधारण से वीडियो के जरिए इस प्रकार की पहल करना यह दर्शाता है कि आज की युवा पीढ़ी अपने क्षेत्र को नशामुक्त देखने के लिए कितनी आतुर है।
इस वायरल रील के बाद अब पूरे उधवा-पियारपुर क्षेत्र में यह उम्मीद जगी है कि स्थानीय प्रशासन और पुलिस इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पियारपुर बाजार और ऐसे संदिग्ध ठिकानों पर गश्त बढ़ाई जाए तथा नशे का काला कारोबार करने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसी जाए।
शौकत दादाभाई की यह कोशिश इस बात की मिसाल बन चुकी है कि यदि आपकी नीयत साफ हो और इरादे मजबूत, तो सोशल मीडिया के एक छोटे से संदेश से भी समाज में बड़ा बदलाव और सकारात्मक क्रांति लाई जा सकती है।
यह भी पढ़ें : पियारपुर प्रज्ञा केंद्र से संचालित हो रहा था रेलवे ई-टिकट का अवैध धंधा, एक युवक गिरफ्तार