कोलकाता / मालदा: न्यू फरक्का और तिलडांगा के बीच रेल ट्रैक धंसने की खबर से उत्पन्न हुई स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया है। पूर्व रेलवे की सतर्कता और युद्धस्तर पर चलाए जा रहे मरम्मत कार्य के चलते रेल सेवाएं तेजी से सामान्य होने की ओर बढ़ रही हैं। रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद वैकल्पिक मार्गों के जरिए ट्रेनों की आवाजाही लगातार जारी रखी गई है।
सतर्क गश्ती टीम ने टला बड़ा हादसा
3 सितंबर की रात भारी बारिश और ट्रैक के पास मौजूद एक तालाब से पानी के रिसाव के कारण मिट्टी कट गई थी, जिससे अप लाइन की जमीन नरम होकर धंस गई। हालांकि, गश्ती पर तैनात रेलकर्मियों ने समय रहते इस खतरे को भांप लिया। इसके तुरंत बाद रेलवे के आपातकालीन दल ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा की दृष्टि से प्रभावित लाइन पर परिचालन रोक दिया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
24 घंटे युद्धस्तर पर जारी है मरम्मत कार्य
घटना के बाद से ही स्थिति को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर काम शुरू कर दिया गया। पटरियों को फिर से मजबूत करने के लिए 6 पाइलिंग रिग और करीब 200 मुख्य कर्मचारियों को तैनात किया गया। रात में काम की गति बढ़ाने के लिए हावड़ा मंडल के अजीमगंज से 100 अतिरिक्त कर्मचारी और 100 स्थानीय मजदूर भी काम में लगाए गए।
ट्रैक को स्थिर करने के लिए पत्थरों की धूल (स्टोन डस्ट) से भरे दर्जनों वैगन मौके पर पहुंचाए गए हैं। सुजनीपारा मानसून रिजर्व के साथ-साथ जमालपुर, भागलपुर और मालदा टाउन से अतिरिक्त सामग्री लगातार घटनास्थल पर भेजी जा रही है।
रेलवे महाप्रबंधक ने की त्वरित कार्रवाई की तारीफ
पूर्व रेलवे की महाप्रबंधक गीतिका पांडे खुद इस पूरे राहत और मरम्मत कार्य की निगरानी कर रही हैं। उनके साथ प्रधान मुख्य इंजीनियर विक्रम गुप्ता और मालदा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जमीनी स्थिति को संभाल रहे हैं।
गीतिका पांडे ने कहा, “ऐसी खराब मौसम की स्थिति में हमारी सबसे पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा और रेल सेवाओं की त्वरित बहाली है। गश्ती टीम की सतर्कता और कर्मचारियों का दिन-रात का समर्पण यह दिखाता है कि रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के प्रति कितना गंभीर है।”
फंसे यात्रियों के लिए खाने-पीने का पूरा इंतजाम
ट्रेनों की गति नियंत्रित करने और डाइवर्ट किए जाने के कारण यात्रियों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए वाणिज्यिक विभाग ने तुरंत आपातकालीन खान-पान व्यवस्था शुरू की।
- तिलडांगा स्टेशन: बेहद कम समय में एक अस्थायी कैटरिंग काउंटर बनाया गया, जहां से यात्रियों को स्नैक्स, भोजन और पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- बल्लालपुर: स्थानीय स्तर पर ताजा खाना, फल जैसे केले, अंकुरित चना, खीरा, बादाम मसाला और पानी की बोतलें बांटी गईं। मालदा से अतिरिक्त टीम भेजकर यहां व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
- न्यू फरक्का जंक्शन: यात्रियों की अचानक बढ़ी मांग को देखते हुए स्टेशन पर मौजूद सभी कैटरिंग स्टॉल रात भर और सुबह तक खुले रखे गए, ताकि किसी को भोजन या पानी की कमी न हो।
भविष्य के लिए आईआईटी और एआई की ली जाएगी मदद
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझी ने बताया कि आपदा के समय रेलवे का प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षा, ट्रैक की बहाली और यात्रियों को तुरंत मानवीय सहायता पहुंचाना होता है।
इसके साथ ही, रेलवे ने फैसला किया है कि मानसून के बाद जलनिकायों के पास की मिट्टी की स्थिति को समझने और भविष्य में भूस्खलन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए आईआईटी (IIT) के विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इसके अलावा पटरियों और आसपास के इलाकों की निगरानी के लिए एआई (AI) आधारित तकनीक तैनात करने की भी योजना है।
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