साहिबगंज: पूर्णाहुति के साथ लक्ष्मी नारायण महायज्ञ का भव्य समापन

साहिबगंज। शहर के साक्षरता चौक (काटरगंज) स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित ‘श्री श्री 1008 श्री 11 कुंडात्मक श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ’ का शुक्रवार को नौवें दिन पूर्णाहुति के साथ विधिवत समापन हो गया। काशी से आए विद्वान आचार्यों के वैदिक मंत्रोच्चार और देश के विभिन्न कोनों से पधारे साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

आधुनिकता के दौर में संस्कारों को बचाना जरूरी: महामंडलेश्वर

महायज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर श्री अयोध्या दास जी महाराज ने वर्तमान सामाजिक परिवेश पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा:

“आज की आधुनिकता की दौड़ में हमारी नई पीढ़ी भारतीय संस्कारों से दूर होती जा रही है। हमारी बेटियां, बेटे और बहुएं अपनी जड़ों को न भूलें, इसके लिए ऐसे धार्मिक आयोजनों की नितांत आवश्यकता है। सूर्य संसार को प्रकाश दे सकता है, लेकिन मनुष्य के भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को केवल संत और शास्त्र ही दूर कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक सनातनी का यह कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को सनातन संस्कृति के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराएं। यज्ञ का प्रसाद ग्रहण करना पुण्यदायी है और ऐसे आयोजनों से समाज का कल्याण सुनिश्चित होता है।

वैदिक अनुष्ठान और पूर्णाहुति

महायज्ञ के अंतिम दिन सुबह काशी के आचार्य डॉ. हरेंद्र द्विवेदी के सानिध्य में 25 सदस्यीय पुरोहितों की टोली ने 33 कोटि देवी-देवताओं का आह्वान किया। निर्धारित शुभ मुहूर्त (दोपहर 12 से 1 बजे) पर नागा साधुओं और अन्य महात्माओं की उपस्थिति में हवन कुंडों में अंतिम आहुति डाली गई। जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।

रासलीला: कंस वध के साथ अधर्म का अंत

महायज्ञ के सांस्कृतिक पड़ाव के तहत वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला का मंचन किया। नवें दिन ‘कंस वध’ प्रसंग का मंचन देख श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अधर्म के प्रतीक कंस का वध करते ही दर्शकों ने ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के नारे लगाए।

  • कलाकार: चंद्रभान पाठक (कंस), हरि ओम दास (हारमोनियम), सुरेश पांडे (तबला), मुन्ना पाठक (चांदुल) एवं अन्य कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी।

यज्ञ समिति का आभार

यज्ञ को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष विमल यादव, केदार यादव, बजरंगी प्रसाद यादव सहित सभी सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। महामंडलेश्वर ने भव्य आयोजन के लिए समिति और जिले के श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। देर रात तक हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और मेले का आनंद लिया।

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