साहिबगंज: गलवान घाटी में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले साहिबगंज के वीर सपूत शहीद कुंदन कुमार ओझा (वीर चक्र, मरणोपरांत) की छठी पुण्यतिथि मंगलवार को उनके पैतृक गांव डिहारी में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। सदर प्रखंड के हाजीपुर पश्चिम पंचायत स्थित डिहारी गांव में आयोजित इस भव्य श्रद्धांजलि सभा में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सैन्य अधिकारियों और भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने शिरकत की। पूरा क्षेत्र ‘शहीद कुंदन ओझा अमर रहें’ और देशभक्ति के नारों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद उपस्थित प्रशासनिक व पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधियों सहित अन्य गणमान्य लोगों ने 16 बिहार रेजिमेंट के वीर जवान शहीद कुंदन कुमार ओझा के तैल चित्र एवं प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके उपरांत सभा में मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर वीर शहीद को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके दिखाए आदर्शों पर चलकर राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया। शिवशंकर यादव की अध्यक्षता में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम का कुशल संचालन मनोज कुमार ने किया।
इस विशेष अवसर पर जिला एवं पुलिस प्रशासन के प्रतिनिधि के रूप में अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अमर जॉन आइंद, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) सुशील कुमार, मंडरो बीडीओ मेधनाथ उरांव और साहिबगंज के सीओ वासुकी नाथ टुडू मुख्य रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान झारखंड राजभाषा साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. सच्चिदानंद ने शहीद कुंदन कुमार ओझा के वीर पिता शिवशंकर ओझा को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। वहीं, 16 बिहार रेजिमेंट के सूबेदार मेजर नरेंद्र नाथ साहा ने गलवान घाटी के ऐतिहासिक संघर्ष को याद करते हुए कर्नल संतोष बाबू सहित देश के लिए शहीद हुए सभी 20 वीर जवानों की वीरता और अदम्य साहस की चर्चा की।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए एसडीओ अमर जॉन आइंद, एसडीपीओ सुशील कुमार, डॉ. सच्चिदानंद, जेएमएम जिलाध्यक्ष अरुण कुमार सिंह, केंद्रीय समिति सदस्य बबलू मिश्रा और पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रामदरश यादव सहित अन्य वक्ताओं ने शहीद के योगदान को रेखांकित किया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि शहीद कुंदन कुमार ओझा का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव देशभक्ति की प्रेरणा देता रहेगा।
सभा के अंत में वक्ताओं और ग्रामीणों ने शहीद ओझा की पावन स्मृति को स्थायी रूप देने के लिए एक महत्वपूर्ण मांग उठाई। उन्होंने जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्ताव रखा कि वीर शहीद के पैतृक गांव में उनके नाम पर एक आधुनिक पुस्तकालय एवं विद्यालय का संचालन किया जाए, ताकि उनकी शहादत को अक्षुण्ण रखा जा सके और स्थानीय बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। प्रशासन के अधिकारियों ने इस दिशा में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन दिया।
