कोलकाता: प्रतिदिन लाखों यात्रियों को सफर कराने वाली ‘पूर्व रेलवे’ ने माल ढुलाई के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। ईस्टर्न रेलवे ने साबित कर दिया है कि उसकी ताकत केवल पैसेंजर ट्रेनों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक सप्लाई चेन को मजबूत करने में भी उसकी भूमिका बेहद अहम है।
चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) के पहले चार महीनों (1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026) के आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व रेलवे ने माल ढुलाई और राजस्व दोनों में शानदार साल-दर-साल (YoY) वृद्धि दर्ज की है।
प्रदर्शन पर एक नज़र:
- कुल माल लदान: चालू वित्तीय वर्ष के पहले 4 महीनों में कुल लदान बढ़कर 33.391 मिलियन टन पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि (32.599 मिलियन टन) की तुलना में 2.43% अधिक है।
- कुल माल राजस्व: माल ढुलाई में बढ़ोतरी से कमाई भी बढ़कर ₹3,192.97 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल के ₹3,044.11 करोड़ के मुकाबले 4.89% की वृद्धि दर्शाती है।
- आयातित कोयला लदान: कोयले का परिवहन इस सफलता का सबसे बड़ा आधार रहा। इसमें 7.29% का उछाल आया और यह 21.567 मिलियन टन से बढ़कर 23.14 मिलियन टन हो गया।
- कोयला ढुलाई से कमाई: कोयले के परिवहन से प्राप्त राजस्व में 13.22% की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे रेलवे को ₹2,263.20 करोड़ की कमाई हुई (पिछले साल यह ₹1,998.95 करोड़ थी)।
आम जनता और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर
पूर्व रेलवे के इस मजबूत प्रदर्शन का सीधा फायदा आम जनजीवन और स्थानीय उद्योगों को मिल रहा है:
- बिना रुकावट बिजली: कोयले की निर्बाध सप्लाई से घरों, अस्पतालों और कारखानों में बिजली संकट का खतरा कम हुआ है।
- महंगाई पर लगाम: किफायती रेल परिवहन से स्थानीय बाजारों में जरूरी वस्तुओं के दाम स्थिर रखने में मदद मिल रही है।
- रोजगार व विकास: व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार पैदा हो रहे हैं।
- यात्री सुविधाओं में सुधार: माल ढुलाई से मिलने वाले अतिरिक्त राजस्व का इस्तेमाल ट्रैक मॉडर्नाइजेशन, स्वच्छ स्टेशनों और अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं के विकास में किया जा रहा है।
पूर्व रेलवे प्रशासन का कहना है कि वे क्षेत्रीय विकास और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के निर्माण के लिए अपनी माल ढुलाई सेवाओं के विस्तार और आधुनिकीकरण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
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