राजमहल (साहिबगंज): मॉडल कॉलेज, राजमहल के सभागार में गुरुवार को ‘करियर परामर्श संवाद’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में हाल ही में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता का परचम लहराने वाली क्षेत्र की गौरव, निहारिका सिन्हा उपस्थित थीं। उनके साथ उनके पिता निरंजन सिन्हा भी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य ने सभी अतिथियों को पौधा भेंट किया एवं सॉल व स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। मंच का कुशल संचालन महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. रमजान अली द्वारा किया गया। इस संवाद कार्यक्रम में महाविद्यालय के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया और अपनी करियर संबंधी जिज्ञासाओं को दूर किया।
”भीड़ के पीछे न भागें, अपनी वास्तविक रुचि को पहचानें”
सभागार में उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए यूपीएससी अचीवर निहारिका सिन्हा ने सीधे संवाद (Q&A) शैली को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि देश की किसी भी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू करने से पहले प्रत्येक छात्र को स्वयं से तीन बेहद महत्वपूर्ण सवाल पूछने चाहिए— पहली, क्या उस क्षेत्र में आपकी वास्तविक (Genuine) रुचि है? दूसरी, क्या आप इस परीक्षा को अपने जीवन के कई साल देने के लिए तैयार हैं? और तीसरी, क्या शुरुआती असफलताओं के बावजूद आप मानसिक रूप से मजबूत बने रहने की क्षमता रखते हैं?
उन्होंने कहा, “अक्सर छात्र समाज की प्रतिष्ठा, दोस्तों की देखा-देखी या पारिवारिक दबाव में आकर करियर चुन लेते हैं, जो बाद में उनके तनाव का कारण बनता है। करियर का चुनाव अपनी आंतरिक क्षमता और रुचि के आधार पर ही होना चाहिए।”
यूपीएससी परीक्षा का यथार्थवादी विश्लेषण
निहारिका ने छात्रों के सामने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा का एक वास्तविक आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए बताया कि हर साल लगभग 10 से 12 लाख छात्र फॉर्म भरते हैं, जिनमें से करीब 6-7 लाख छात्र प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) में बैठते हैं। इनमें से मात्र 14 हजार मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए योग्य घोषित होते हैं, जिनमें से लगभग 2700 छात्र इंटरव्यू तक पहुंचते हैं और अंततः केवल 900 के करीब छात्रों का अंतिम चयन होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकुचित सफलता दर (Narrow Success Rate) देश की हर बड़ी परीक्षा पर लागू होती है, इसलिए छात्रों को इस वास्तविकता को ध्यान में रखकर ही अपनी रणनीति बनानी चाहिए।
सफलता के चार मुख्य स्तंभ: अनुशासन, धैर्य, निरंतरता और व्यक्तित्व
निहारिका ने अपने संबोधन में सफलता के लिए चार सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया:
- अनुशासन (Discipline): भविष्य की अनिश्चितता के बावजूद रोज 8 से 10 घंटे पूरी निष्ठा के साथ पढ़ाई की मेज पर बैठना ही सच्चा अनुशासन है।
- धैर्य (Patience): जब आपके साथी जीवन में आगे बढ़ रहे हों और आप असफलताओं का सामना कर रहे हों, उस समय खुद पर विश्वास बनाए रखना और धैर्य न खोना सबसे बड़ी परीक्षा है।
- निरंतरता (Consistency): यूपीएससी कोई स्प्रिंट (छोटी दौड़) नहीं बल्कि एक मैराथन है, जहां आपको हर दिन उठकर अपने रूटीन को फॉलो करना होता है। महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप 12 घंटे पढ़ें, बल्कि यह है कि आप हर दिन बिना रुके प्रयास करें।
- व्यक्तित्व विकास (Personality Development): निहारिका ने बताया कि यूपीएससी का तीसरा चरण केवल ‘इंटरव्यू’ नहीं बल्कि ‘पर्सनालिटी टेस्ट’ है। वहां आपके ज्ञान का नहीं बल्कि आपके दृष्टिकोण, ईमानदारी और निर्णय लेने की क्षमता का परीक्षण होता है। उन्होंने साझा किया कि यदि आपको किसी सवाल का जवाब नहीं आता, तो इंटरव्यू बोर्ड के सामने अत्यंत विनम्रता से “Sorry Sir, मुझे नहीं पता” कहना भी आपकी ईमानदारी को दर्शाता है और इसके भी सकारात्मक अंक मिलते हैं।
सोशल मीडिया से दूरी और समाचार पत्र पढ़ने की सलाह
छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप या ट्विटर ज्ञान के प्राथमिक स्रोत नहीं होने चाहिए। छात्रों को अपनी प्रामाणिक राय (Authentic Opinion) बनाने के लिए रोजाना कम से कम एक राष्ट्रीय व स्थानीय समाचार पत्र (Newspaper) अनिवार्य रूप से पढ़ना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि कक्षा 5-6 से ही उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का था और उन्होंने लक्ष्य प्राप्ति तक खुद को पूरी तरह केंद्रित रखा।
’प्लान-बी’ (Plan-B) भी है जरूरी
संवाद के अंतिम चरण में छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए निहारिका ने एक अत्यंत व्यावहारिक सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिद होना अच्छी बात है, लेकिन जीवन में व्यावहारिक होना भी उतना ही जरूरी है। यदि 2-3 प्रयासों के बाद भी सफलता नहीं मिलती है, तो छात्रों के पास एक ‘प्लान-बी’ (जैसे- उच्च शिक्षा, पीएचडी, राज्य लोक सेवा आयोग (State PSC) या अन्य परीक्षाएं) तैयार होना चाहिए। हर परिवार की वित्तीय स्थिति या बैकअप एक जैसा नहीं होता, इसलिए योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना बुद्धिमानी है।
प्राचार्य ने जताया आभार
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने निहारिका सिन्हा की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि साहिबगंज जैसे क्षेत्र से निकलकर देश की सर्वोच्च परीक्षा में सफलता पाना कॉलेज के अन्य छात्र-छात्राओं के लिए एक महान प्रेरणा है। उन्होंने कॉलेज के छात्रों को निहारिका के विचारों को आत्मसात करने की सीख दी। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया।
