राजमहल (साहिबगंज): साहिबगंज जिले के व्यवहार न्यायालय राजमहल की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ-प्रथम) वैशाली कुमारी श्रीवास्तव की अदालत ने पत्नी की बेरहमी से हत्या करने के मामले में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति इंसान शेख को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना राशि अदा नहीं करने की स्थिति में दोषी को छह महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस संबंध में अपर लोक अभियोजक (APP) संतोष कुमार टुडू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले की विस्तृत जानकारी साझा की है।
यह पूरा मामला वर्ष 2020 का है, जो राधानगर थाना कांड संख्या 118/20 (सत्र वाद संख्या 35/21) के रूप में दर्ज था। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह मामला मृतका रुखसाना बीबी के पिता अली हुसैन (ग्राम-बेगमगंज, हब्बू मंडल टोला) के लिखित आवेदन पर दर्ज किया गया था। घटना 22 अप्रैल 2020 की रात करीब 10:30 बजे की है, जब पति इंसान शेख ने आपसी विवाद में अपनी पत्नी रुखसाना बीबी के साथ पहले लाठी-डंडे से मारपीट की और बाद में गला दबाकर उसकी जान ले ली। हत्या के बाद साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से आरोपी ने शव को घर के बाहर आम के पेड़ के नीचे फेंक दिया था, जिसे बाद में उठाकर वापस बरामदे पर लाकर एक साड़ी से ढक दिया था।
इस संवेदनशील मामले में मृतका का 8 वर्षीय मासूम बेटा शाहिद शेख घटना का मुख्य चश्मदीद (आईविटनेस) बना। मासूम बच्चे ने अपने नाना अली हुसैन को रोते हुए बताया था कि “पापा ने दिन में मम्मी को मारा था और रात में गला दबाकर जान से मार दिया।” जब बच्चे ने शोर मचाने की कोशिश की, तो आरोपी पिता ने उसके साथ भी मारपीट की और उसे चुप रहने की धमकी दी। मासूम बेटे की अदालत के समक्ष दी गई यही निडर गवाही इस पूरे मामले में आरोपी को सजा दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक कड़ी साबित हुई।
अपर लोक अभियोजक संतोष कुमार टुडू ने बताया कि पुलिस द्वारा अनुसंधान (इन्वेस्टिगेशन) पूरा होने के बाद आरोपी अमानत निवासी इंसान शेख के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद अदालत में चले ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 9 गवाहों को पेश किया गया। इन गवाहों में मृतका की मां, भाई, मुख्य चश्मदीद गवाह (बेटा शाहिद शेख) और घटना की जांच करने वाले पुलिस पदाधिकारी शामिल थे। इसके अलावा अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की कि मृतका की मौत गला दबाने के कारण दम घुटने से हुई थी।
अदालत ने सभी गवाहों के बयानों, उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी इंसान शेख को मृतका रुखसाना बीबी की हत्या का पूर्ण दोषी पाया। न्यायाधीष वैशाली कुमारी श्रीवास्तव ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई। इस फैसले के बाद मृतका के परिजनों ने न्याय व्यवस्था के प्रति आभार व्यक्त किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जघन्य अपराधों में चश्मदीद गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर समय से सजा मिलना समाज में कानून के इकबाल को मजबूत करता है।
रिपोर्ट: राकेश रमण सरकार , राजमहल
