राजमहल/सिक्किम: कंचनजंघा पर्यटन महोत्सव के भव्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक एवं जनजातीय विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। इस प्रतिष्ठित आयोजन में राजमहल के विधायक एम.टी. राजा ने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए झारखंड की पारंपरिक कला, वस्त्र और हस्तशिल्प को प्रदर्शित किया और राज्य की सांस्कृतिक विविधता की एक नई पहचान गढ़ी।
पलाश, सोहराय और सिल्क उत्पादों की लगी भव्य प्रदर्शनी
महोत्सव में आयोजित विशेष प्रदर्शनी में झारखंड की विशिष्ट पहचान को रेखांकित करने वाले विभिन्न उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। इनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
- पारंपरिक हस्तशिल्प: पलाश के उत्पाद और झारखंडी बाँस शिल्प।
- लोक चित्रकला: प्रसिद्ध सोहराय-कोहबर चित्रकला।
- पारंपरिक वस्त्र: तसर सिल्क साड़ियां, टुमका चादर, कुचाई सिल्क और पेंचो साड़ियां।
“झारखंड की संस्कृति देश की धरोहर”: विधायक एम.टी. राजा
कार्यक्रम के दौरान राजमहल विधायक एम.टी. राजा ने कहा, “झारखंड की संस्कृति केवल हमारे राज्य की पहचान नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अभिन्न हिस्सा है। हमारी जनजातीय कला, लोक परंपराओं और प्राकृतिक संसाधनों से निर्मित उत्पादों में स्थानीय कारीगरों की कड़ी मेहनत और पीढ़ियों पुरानी परंपराएं झलकती हैं।”
कलाकारों और बुनकरों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय बाजार
विधायक ने आगे जोर देकर कहा कि कंचनजंघा पर्यटन महोत्सव जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झारखंड की कला-संस्कृति का प्रदर्शन राज्य के स्थानीय कलाकारों, बुनकरों और हस्तशिल्पकारों के लिए नए अवसर खोलेगा। इससे न केवल झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर देश-विदेश के पर्यटकों तक पहुंचेगी, बल्कि ग्रामीण कारीगरों की आजीविका में भी सुधार होगा।
अंतरराष्ट्रीय आगंतुकों ने की सराहना
महोत्सव में देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों और आगंतुकों ने झारखंड के मंडप (पवेलियन) में गहरी रुचि दिखाई। वहां प्रदर्शित पारंपरिक कलाकृतियों और हस्तशिल्प की सराहना करते हुए वैश्विक मंच पर झारखंड की इस पहल को खूब सराहा गया।
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