धान की फसल कटाई के दौरान किसान

बरहेट (साहिबगंज): प्रखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर किसानों के चेहरों पर खुशी और खेतों में चहल-पहल देखने को मिल रही है। बरहेट प्रखंड के सनमनी और सरजमघुटू गांव में बहुप्रतीक्षित भादो धान की कटाई शुरू हो गई है। खेतों में पककर तैयार हो चुकी सुनहरी फसल को काटने और समेटने में किसान परिवार पूरे उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। इन दिनों क्षेत्र के खेतों और सड़कों के किनारे धान के बड़े-बड़े पूले दिखाई देने लगे हैं।

पशुओं के चारे और नए चावल के स्वाद की आस

स्थानीय किसानों का कहना है कि इस क्षेत्र में भादो धान की पैदावार हर साल की तरह काफी अच्छी होती है। फसल की कटाई के साथ ही किसानों को दोहरा लाभ मिलता है; धान कटने के बाद निकलने वाला कच्चा पुआल बैलों और अन्य पशुओं के लिए एक पौष्टिक और बेहतरीन चारे का काम करता है। वहीं दूसरी ओर, ग्रामीणों को नई फसल से तैयार होने वाले चावल की खास खुशबू और स्वाद का बेसब्री से इंतजार रहता है, जिसे वे विभिन्न त्योहारों और विशेष अवसरों पर बेहद चाव से पकाते हैं।

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महज फसल नहीं, पूर्वजों की सांस्कृतिक परंपरा है खेती

कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय किसानों के अनुसार, भादो धान की खेती केवल आर्थिक साधन या फसल नहीं है। यह यहाँ के किसानों के लिए पूर्वजों से चली आ रही एक ऐतिहासिक कृषि परंपरा और समृद्ध ग्रामीण संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है। कटाई के इस मौसम में महिला और पुरुष किसान मिलकर सामूहिक मेहनत की मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे खेतों में धान की कटाई और भंडारण का काम काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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