न्यूज़ डेस्क : भारतीय सिनेमा के जिंदादिल और बेबाक अभिनेताओं में से एक, नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में गोवा स्थित उनके आवास पर हृदय गति रुकने (कार्डियक अरेस्ट) से निधन हो गया। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से न केवल बॉलीवुड और मराठी सिनेमा, बल्कि पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है।
अभिनय का वह अंदाज़, जो इतिहास बन गया
नाना पाटेकर (विश्वनाथ पाटेकर) सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे अभिनय की एक पूरी पाठशाला थे। 1970 के दशक से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले नाना ने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘अपहृत’ और ‘वेलकम’ जैसी अनगिनत फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
‘क्रांतिवीर’ में उनका संवाद “ये मुसलमान का खून है, ये हिंदू का खून है… बता इसमें कौन सा मुसलमान का, कौन सा हिंदू का?” आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली डायलॉग्स में गिना जाता है। गंभीर और तीखे किरदारों से लेकर कॉमेडी भूमिकाओं (जैसे ‘वेलकम’ का उदय भाई) तक, उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उत्कृष्ट अभिनय के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Awards) और पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, असल जिंदगी के भी ‘नायक’
पर्दे पर दमदार अभिनय करने वाले नाना पाटेकर निजी जिंदगी में बेहद सादे और जमीनी इंसान थे। किसानों और पीड़ितों की मदद के लिए उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ (Naam Foundation) की स्थापना की। महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों के पुनर्वास और उनकी आर्थिक सहायता के लिए उन्होंने जो निस्वार्थ कार्य किया, उसने उन्हें आम जनता का सच्चा मसीहा बना दिया। अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाने वाले नाना पाटेकर सादगी की मिसाल थे।
सिनेमा जगत और प्रशंसकों में शोक
नाना पाटेकर के जाने से सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन पैदा हो गया है जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। राजनीतिक हस्तियों, खेल जगत और बॉलीवुड की तमाम बड़ी शख्सियतों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
भारतीय सिनेमा में उनके अप्रतिम योगदान, कड़क आवाज़, बेमिसाल संवाद अदायगी और समाज के प्रति उनके समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।
ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार व करोड़ों चाहने वालों को यह दुख सहने की शक्ति दे।
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