राजमहल (साहिबगंज): इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) के ‘श्री श्री राधा कन्हाईयालाल मंदिर’ , कन्हैया स्थान में श्रीमती राधारानी का प्राकट्योत्सव राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2026) शनिवार, 19 सितंबर 2026 को अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन और संस्थापक आचार्य हिज डिवाइन ग्रेस ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के मार्गदर्शन में इस पावन अवसर पर दिनभर भव्य भक्तिमय कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।
राधा अष्टमी 2026: विस्तृत कार्यक्रम (Program Schedule)
श्रद्धालुओं और भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने समय-सारणी जारी की है:
- सुबह 08:30 बजे: दर्शन आरती
- सुबह 09:00 बजे: कथा (राधारानी के दिव्य चरित्र एवं महिमा पर प्रवचन)
- सुबह 10:00 बजे: हरिनाम संकीर्तन
- सुबह 11:00 बजे: भगवान श्री श्री राधा कन्हाईयालाल का भव्य अभिषेक
- दोपहर 12:00 बजे: राजभोग एवं महाआरती
- दोपहर 01:00 बजे: महाप्रसाद (भंडारा) वितरण
स्थान का विवरण (Venue Details):
- स्थान: इस्कॉन कनाई नाटशाला, कन्हाई स्थान, राजमहल, जिला – साहिबगंज, झारखंड
इस्कॉन कनाई नाटशाला मंदिर समिति ने सभी क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस पावन पर्व का हिस्सा बनें, राधारानी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें और महाप्रसाद ग्रहण करें।
यह भी जानें – कन्हैया स्थान (कनाई नाटशाला), राजमहल का इतिहास एवं महिमा
राजमहल स्थित कन्हैया स्थान (कनाई नाटशाला) सनातन धर्म और गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय का एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है।
- पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व: माना जाता है कि महाप्रभु श्री चैतन्य देव वर्ष 1515 में वृंदावन की यात्रा के दौरान इस स्थान पर पधारे थे। यहाँ पहुँचते ही उन्हें भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप (कन्हाई) के दर्शन और उनकी दिव्य लीलाओं का प्रत्यक्ष अनुभव (अनुभूति) हुआ था, जिसके कारण इस स्थान का नाम ‘कनाई नाटशाला’ (कन्हाई की लीला भूमि) पड़ा।
- इस्कॉन मंदिर: वर्तमान में यहाँ अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) द्वारा संचालित एक विशाल और सुंदर मंदिर (श्री श्री राधा कन्हाईयालाल मंदिर) स्थित है।
- प्राकृतिक सौंदर्य: गंगा नदी के तट पर और राजमहल की पहाड़ियों के मनोरम वातावरण में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को असीम शांति और भक्ति रस का अनुभव होता है।
मंगलहाट (Mangal Hat), राजमहल का परिचय
राजमहल अनुमंडल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला मंगलहाट इस क्षेत्र का एक प्रमुख, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र है।
- नामकरण और परंपरा: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, ‘मंगल हाट’ का मुख्य बाजार पारंपरिक रूप से सप्ताह में मंगलवार के दिन लगता है। यह सदियों पुराना ग्रामीण बाजार है जहाँ आसपास के दूर-दराज गांवों और आदिवासी क्षेत्रों से लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं और व्यापार के लिए आते हैं।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: राजमहल का क्षेत्र मुगलकाल (विशेषकर राजा मानसिंह और नवाब शुजा-उद्दीन के समय) में बंगाल की राजधानी हुआ करता था। मंगल हाट उसी ऐतिहासिक कालखंड से चला आ रहा व्यापारिक केंद्र माना जाता है, जो आज भी स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
- कन्हैया स्थान से समीपता: मंगल हाट, कन्हैया स्थान मंदिर के बिल्कुल पास स्थित है। जो भी श्रद्धालु या पर्यटक इस्कॉन मंदिर (कनाई नाटशाला) में दर्शन के लिए आते हैं, वे मंगल हाट क्षेत्र की ऐतिहासिक झलक और स्थानीय संस्कृति का अनुभव भी अवश्य करते हैं।
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