साहिबगंज: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के दिशा-निर्देशानुसार स्वास्थ्य विभाग एवं साहिबगंज महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘आत्महत्या रोकथाम एवं तनावमुक्त जीवन’ विषय पर एक दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय के बीएड भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में सदर अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. आरसी खानम उपस्थित रहीं।
चुप्पी तोड़ें और विशेषज्ञ की मदद लें: प्राचार्य
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि “मानसिक स्वास्थ्य ही वास्तविक स्वास्थ्य है।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि मानसिक तनाव या निराशा की स्थिति में ‘चुप्पी की संस्कृति’ तोड़ें। अपनी समस्याओं को छुपाने के बजाय परिवार, दोस्तों या किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करें और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते मनोचिकित्सक से परामर्श लें।
हर उम्र में दिख रहे मानसिक तनाव के लक्षण: डॉ. आरसी खानम
मुख्य अतिथि डॉ. आरसी खानम ने बताया कि आत्महत्या की प्रवृत्ति केवल युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों और वयस्कों में भी देखी जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि सही समय पर काउंसलिंग और चिकित्सकीय उपचार से इस स्थिति से पूरी तरह बाहर निकला जा सकता है।
आयोजन के मुख्य बिंदु:
- समारोह का शुभारंभ: कार्यक्रम का संचालन व संयोजन मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर प्रसाद ने किया।
- प्रतियोगिताएं: छात्रों के बीच पोस्टर मेकिंग, स्लोगन और क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। विजेता प्रतिभागियों को अतिथियों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
- मंच संचालन: बीएड विभाग के प्राध्यापक प्रो. नितिन कुमार घोष ने मंच संचालन किया।
कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार, बीएड विभागाध्यक्ष डॉ. डेविड यादव, एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी प्रो. कुमार प्रशांत भारती, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सुविधा कुमारी व नेहा कुमारी, सोशल वर्कर राजीव पॉल सहित स्वास्थ्य विभाग व कॉलेज के कई गणमान्य लोग एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।



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