साहिबगंज: जिले में संचालित सभी निजी विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्र-छात्राओं को सुरक्षित, स्वस्थ, अनुशासित और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण देने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त -सह- जिला दंडाधिकारी के निर्देश पर जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में व्यापक निरीक्षण अभियान शुरू किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, मानको के पालन और शैक्षणिक गुणवत्ता की गहन जांच की जाएगी।
इन प्रमुख मानकों की होगी बारीकी से जांच
निरीक्षण के दौरान जांच दल विद्यालयों से जुड़ी निम्नलिखित व्यवस्थाओं का भौतिक सत्यापन करेगा:
- मान्यता व कागजात: विद्यालय की मान्यता, RTE (शिक्षा का अधिकार) और स्थापना संबंधी स्वीकृतियों की जांच।
- सुरक्षा एवं सीसीटीवी: स्कूल परिसर में सीसीटीवी कैमरे, फायर फाइटर (अग्नि सुरक्षा), आपातकालीन निकास और सुरक्षा गार्ड्स की मौजूदगी।
- पेयजल व स्वच्छता: पीने के साफ पानी, शौचालय की व्यवस्था तथा भवन व परिसर की साफ-सफाई।
- शिक्षक व पढ़ाई: शिक्षकों की कुल संख्या, उनकी शैक्षणिक योग्यता, छात्र-शिक्षक अनुपात और प्रयोगशाला व पुस्तकालय का वास्तविक उपयोग।
- फीस में पारदर्शिता: एडमीशन फीस, एनुअल फीस, ट्यूशन फीस की सूची और उनके बदले दी जाने वाली सुविधाओं का सत्यापन।
- शिकायत निवारण व्यवस्था: शारीरिक दंड, मानसिक उत्पीड़न रोकने के उपाय और स्कूल में शिकायत पेटिका की उपलब्धता।
- परिवहन सुरक्षा: स्कूल बसों व वाहनों के रजिस्ट्रेशन, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, इंश्योरेंस, PUC, ड्राइवर का ड्राइविंग लाइसेंस, फर्स्ट एड बॉक्स और अग्निशामक यंत्र।
- हॉस्टल सुविधाएं: आवासीय परिसरों (हॉस्टल्स) में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों की स्थिति।
हर प्रखंड में बनी 5 सदस्यीय जांच टीम
उपरोक्त सभी बिंदुओं की जांच के लिए जिले के प्रत्येक प्रखंड में 5 सदस्यों वाली एक विशेष जांच टीम गठित की गई है। इस टीम में निम्नलिखित पदाधिकारियों को शामिल किया गया है:
- प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (शिक्षा विभाग)
- सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (स्वास्थ्य विभाग)
- महिला एसआई (SI) या एएसआई (ASI) (पुलिस विभाग)
- महिला पर्यवेक्षिका (समाज कल्याण विभाग)
- प्रखंड कल्याण पदाधिकारी
यह पूरी जांच टीम संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के सीधे पर्यवेक्षण (Supervision) में काम करेगी।
हर हफ्ते कम से कम 2 स्कूलों का होगा निरीक्षण
जांच दल को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे प्रति सप्ताह कम से कम दो निजी विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य रूप से करेंगे। जांच के बाद निर्धारित प्रारूप में एक विस्तृत रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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