साहिबगंज/राजमहल: संतान की दीर्घायु, आरोग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना का पवित्र पर्व जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत शुक्रवार को ‘नहाय-खाय’ के साथ साहिबगंज जिले भर में श्रद्धा और उल्लासपूर्वक शुरू हो गया। इस अवसर पर राजमहल गंगा घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अपने व्रत का संकल्प लिया।
गंगा स्नान के बाद व्रती महिलाओं ने गंगाजल घर लाकर पारंपरिक तरीके से नहाय-खाय का प्रसाद तैयार किया। जिले के तीनपहाड़ , उधवा, बरहरवा, बरहेट, बोरियो, तालझारी और साहिबगंज सदर सहित सभी क्षेत्रों में जितिया पर्व को लेकर आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है।
बाजारों में बढ़ी चहल-पहल, खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़
जितिया पर्व को लेकर राजमहल और आसपास के स्थानीय बाजारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। फल, पूजा सामग्री, जिउतिया (धागा/लॉकेट), कंदा, नोनी का साग और जीमूतवाहन देव की पूजा से जुड़ी अन्य सामग्रियों की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ जुट रही है। बाजार में रोरी, अक्षत और विशेष पूजन सामग्री व फल-फूल की मांग सबसे अधिक देखी जा रही है।
जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत और इसका महत्व?
जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे आम भाषा में जितिया व्रत भी कहा जाता है, मुख्य रूप से माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और जीवन की रक्षा के लिए रखा जाने वाला एक अत्यंत कठिन और फलदायी व्रत है।
- 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत: नहाय-खाय के अगले दिन व्रती महिलाएं पूरा दिन और पूरी रात बिना अन्न-जल ग्रहण किए अहोरात्र (24 घंटे से अधिक) निर्जला उपवास रखती हैं। इसके उपरांत तीसरे दिन पारण के साथ व्रत संपन्न होता है।
- भगवान जीमूतवाहन की पूजा: इस पावन अवसर पर भगवान जीमूतवाहन की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जीमूतवाहन एक दयालु और धर्मात्मा राजा थे, जिन्होंने गरुड़ देव से नागों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्हीं की कृपा से संतान पर आने वाले बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
- पारंपरिक कथा और धार्मिक विधान: व्रत के दिन शाम को महिलाएं एक जगह एकत्र होकर जितिया व्रत की कथा सुनती हैं, जिसमें चील और सियारिन की कथा विशेष रूप से प्रचलित है।
साहिबगंज जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस बल ने राजमहल गंगा घाट पर उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को स्नान और पूजा में कोई असुविधा न हो।
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