तीनपहाड़ (साहिबगंज): राजमहल प्रखंड क्षेत्र के तीनपहाड़ में विजयादशमी के पावन अवसर पर बुधवार सुबह एक भव्य कलश विसर्जन यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की संख्या में कन्याएं और सुहागिन महिलाएं शामिल हुईं। सुबह से ही पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में रंग गया।
सिंदूर खेला की रस्म के साथ हुई मां की विदाई
विजयादशमी के मौके पर बंगाली रीति-रिवाजों के अनुसार पारंपरिक ‘सिंदूर खेला’ का विशेष आयोजन किया गया। सुबह करीब 8 बजे से शुरू हुई इस रस्म में सबसे पहले पुरोहित ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद सुहागिन महिलाओं ने मां के चरणों में सिंदूर चढ़ाकर आशीर्वाद लिया और एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। ढाक की थाप और पारंपरिक गीतों के बीच महिलाओं ने इस रस्म को बेहद हर्षोल्लास के साथ निभाया।
रामपुरा नदी तट पर संपन्न हुआ कलश विसर्जन
सिंदूर खेला संपन्न होने के बाद कलश विसर्जन यात्रा शुरू हुई। नवरात्रि के पहले दिन जिन महिलाओं ने रामपुरा नदी से पवित्र जल लाकर कलश स्थापित किया था, वे कतारबद्ध होकर अपने कलश के साथ यात्रा में शामिल हुईं।
ढाक की थाप, शंखनाद, उलू ध्वनि और ‘बोलो दुर्गा माई की जय’ के गगनभेदी जयकारों के बीच यह यात्रा पंडाल से रवाना होकर तीनपहाड़ रेलवे स्टेशन रोड, मुख्य बाजार, नीचे टोला और बाबूपुर से होते हुए रामपुरा नदी तट पर पहुंची। नदी तट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच महिलाओं ने कलश का जल, नारियल, सिक्के और आम के पत्ते विसर्जित किए। इसके बाद भक्तों पर शांति जल का छिड़काव किया गया।
शुक्रवार को होगा मुख्य प्रतिमा का विसर्जन
पूजा समिति के कोषाध्यक्ष पिंटू यादव ने जानकारी दी कि मां दुर्गा की मुख्य प्रतिमा का विसर्जन शुक्रवार को किया जाएगा। शुक्रवार को गाजे-बाजे और भव्य जुलूस के साथ मां की प्रतिमा को नम आंखों से अंतिम विदाई दी जाएगी। इस आयोजन को सफल बनाने में पूजा समिति के सभी सदस्यों, वालंटियरों और सैकड़ों श्रद्धालुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।



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